आयो बसन्त आयो... 🌷
नयनों को क्या भाये
रंगो से भरी,
सवर्ण किरणों से सजी,
प्रकृति के रस सिंचित,
अखंड सौभाग्य रचित,
आह्लादित सौंदर्य स्वरूप हो।
अधरों को क्या भाये
रस कुंज आनंद
स्पंदन से भरे,
मधुर प्रीत
अमृत से भीगोये,
रोम रोम आत्म रमे
लीला रीत,
काल काम हराय।
नासिका को क्या भाये
मद भरी नशीली
गहरी महक में डूबोय,
अंग अंग सुधबुध खोय,
चंचल चित्त चुराय,
सुगंध तरंग बरसाय।
कर्णो को क्या भाये
नाद अनेरो, स्वर मधुरो,
सूर आत्म ज्योत खिंचाय,
नाच नचाये
तन मन धन को,
आकर्षक अंग अंग अंगडाय,
हर अदा मतवाली झुमे,
दौडे विरहता तीव्र गति से,
मिलन को
श्वास श्वास बिखराय।
यह एक ऐसी अनुभूति
स्पर्श करा रहा हूँ,
जो सेवा मिलन से होती है,
केवल श्री कृष्ण
चरित्र को मन, चित्त,
तन और श्वास श्वास में
बसा कर आत्मा को
स्पर्श कराती हूँ।
आनंद लूटती हूँ
और आनंद लूटा रही हूँ।
मन को क्या भाये
तन को क्या भाये
धडकन को क्या भाये
दिल को क्या भाये
यही मेरा स्पंदन है।
🌸 जय श्री कृष्ण

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